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Compound interest

Compound interest is interest that builds up over a set length of time on both principal and interest. The principal is also used to account for the interest that has accrued on a principal over time. Furthermore, the accumulated principal value is used to calculate interest for the subsequent time period. The new way of calculating interest now utilised in all international financial and commercial operations is known as compound interest. When we look at the compound interest values that have built over successive time periods, the power of compounding is clearly apparent.

चक्रवृद्धि ब्याज क्या है | Compound Interest in Hindi

जब किसी समय पर अभी तक संचित किए हुए ब्याज को मूलधन में मिलाकर, मिश्रधन पर ब्याज की गणना की जाती है, तो उसे चक्रवृद्धि ब्याज हैं. जिस निश्चित समय अंतराल के बाद ब्याज की गणना करके उसे मूलधन में जोड़ा जाता है, तो उसे चक्रवृद्धि ब्याज कहा जाता हैं.

दुसरें शब्दों में, जब किसी व्यक्ति या बैंक से ली गई धनराशि का ब्याज समय पर न देकर उसे मूल धनराशि में जोड़ दिया जाता है और फिर उस धनराशि पर ब्याज लगाया जाता है, उसे चक्रवृद्धि ब्याज कहते है.

Note:-

1. किसी व्यक्ति या बैंक ऋण लेने वाला त्रणदाता या साहूकार कहलाता हैं.

2. ऋण लिया गया धन मूलधन कहलाता है.

3. जिस अवधि तक ऋण लिया जाता है, वह समय कहलाता है.

4. मूलधन और ब्याज के सम्मिलित रूप को मिश्रधन कहा जाता है.

5. किसी धन पर जिस दर से ब्याज लिया जाता है, उसे ब्याज दर कहा जाता है.

चक्रवृद्धि ब्याज फार्मूला | Compound Interest formula in Hindi

ब्याज सम्बंधित प्रशों को हल करने के लिए निम्न फार्मूला का प्रयोग किया जाता है.

Compound Interest ( CI ) = A – P

जहाँ:-

  • P = मूलधन ( Principal)
  • r = ब्याज की वार्षिक दर ( Rate of Interest)
  • n = एक वर्ष में कुल ब्याज-चक्रों की संख्या
  • t = कुल समय (Time)
  • A = t समय बाद मिश्रधन (Amount)
  • CI = चक्रवृद्धि ब्याज ( Compound Interest )

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